February 8, 2026 3:06 pm

बड़े तेवड़ा में कफन-दफन विवाद शांत, प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद हालात नियंत्रण में ।

कांकेर। जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र अंतर्गत बड़े तेवड़ा गांव में धर्मांतरित परिवार के एक व्यक्ति के शव के कफन-दफन को लेकर बीते चार दिनों से चला आ रहा विवाद अब शांत हो गया है। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच धर्मांतरित सरपंच राजमन सलाम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने पूरे मामले का अपना पक्ष विस्तार से रखा है। सरपंच राजमन सलाम ने वीडियो बयान में बताया कि उनके पिता के निधन के बाद उन्होंने गांव के प्रमुख लोगों से परंपरागत रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, विरोध के चलते उन्हें अपने निजी पट्टे की जमीन पर अंतिम संस्कार करना पड़ा। उनका आरोप है कि इसके बाद 16 और 17 दिसंबर को गांव में रैली निकाली गई, जिसमें विरोध के दौरान मारपीट की घटना हुई। इस झड़प में उनके बड़े भाई और भाभी गंभीर रूप से घायल हो गए।

सरपंच का यह भी कहना है कि 18 दिसंबर को तनावपूर्ण स्थिति के बीच शव को कब्र से निकालकर ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान प्रार्थना भवन और उनके घर में आगजनी की गई। आगजनी की इस घटना में घर में रखा सोना-चांदी, करीब 4 लाख रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए। इन आरोपों के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया, जिससे गांव में तनाव का माहौल बन गया। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर कांकेर जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष और आदिवासी नेता ईश्वर कावड़े ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें ईसाई मिशनरियों से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, लेकिन आदिवासी समाज की परंपराओं, देवी-देवताओं, पेन-पुरखों और आंगादेव के अपमान को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ईश्वर कावड़े ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के अपमान को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ईश्वर कावड़े ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के दौरान कुछ लोगों से देवी-देवताओं को त्यागने और उन्हें अविश्वासी कहे जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जो समाज के लिए चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी धर्मांतरित व्यक्ति का अंतिम संस्कार गांव की परंपराओं के अनुरूप किया जाता है।

उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन परंपराओं के विपरीत तरीके से अंतिम संस्कार किए जाने पर आदिवासी समाज द्वारा विरोध किया जाएगा। साथ ही उन्होंने धर्मांतरण कर चुके लोगों से मूल धर्म में लौटने की अपील भी की। जानकारी के अनुसार, मृतक की मृत्यु के बाद गांव में एक बैठक भी हुई थी। इस बैठक में गायता, पुजारी और पटेल सहित गांव के प्रमुख लोगों ने कहा था कि यदि अंतिम संस्कार गांव की परंपरागत रीति-रिवाज से किया जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। आरोप है कि इसके बावजूद मृतक के परिजनों ने विदेशी परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने पर जोर दिया, जिसके चलते ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों की मांग पर शासन-प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए कब्र से शव को बाहर निकलवाया। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई। फिलहाल गांव में पुलिस बल की मौजूदगी के बीच स्थिति सामान्य बताई जा रही है, हालांकि कुछ समय तक माहौल तनावपूर्ण रहा। प्रशासन ने मामले की जांच  शुरू कर दी है और आगजनी व मारपीट की घटनाओं से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गांव में शांति बहाल होने के बाद अब सभी पक्षों से संयम बरतने और कानून का पालन करने की अपील की जा रही है।

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