February 8, 2026 4:42 pm

छत्तीसगढ़ ट्रांसफार्मर और पानी टंकी पर अवैध कब्जा, शिकायत करने वाली महिला और उसके परिवार को पीटा।

रायगढ़। जिले के खरसिया क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम साल्हेपाली एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां गांव की पानी टंकी और ट्रांसफार्मर के चारों ओर बाउंड्री बनाकर गेट लगा दिया गया है। इस पूरे मामले की जिला कलेक्टर से शिकायत करने वाली एक प्रभावित महिला संतोषी बैरागी ने बताया कि उसके परिवार को कांग्रेस के कुछ दबंगों द्वारा पीटा गया। इसके बाद वह डर से सपरिवार गांव छोड़कर दूसरे जिले चली गई। शिकायत के 13 महीने के बाद इस मामले में पटवारी पहुंचा, मगर विवाद होने की स्थिति बताकर बैरंग लौट गया।

पटवारी भी डरा ग्राम साल्हेपाली निवासी संतोषी बैरागी ने बीते 21 मई 2024 को कलेक्टर जनदर्शन में शासकीय भूमि पर बाउंड्रीवाल कर दरवाजा लगाकर अतिक्रमण करने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अब एक साल बाद शिकायत की जांच के लिए राजस्व विभाग से पटवारी तो भेजा गया। इसी बीच पटवारी को किसी का फोन आया और पटवारी ने विवाद होने की स्थिति बताकर अन्य पटवारी और राजस्व अधिकारी की उपस्थिति में पंचनामा प्रतिवेदन बनाने की बात लिखकर चला गया।

कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत 21 मई 2024 को जनदर्शन दी गई शिकायत में बताया कि आवेदिका के मकान के अवागमन मार्ग, शासकीय शौचालय, एवं पानी नाली को बंद कर दिया गया है और साथ ही उनके घर के टीन के छज्जे को तोड़ने और कन्हैया पटेल द्वारा शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 273/2/ख में अतिक्रमण कर बाउंड्रीवाल कर दरवाजा लगा दिया गया है। जिस भूमि पर शासकीय पानी टंकी और शासकीय विद्युत ट्रांसर्फमर लगा हुआ है, उक्त सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है। इन सब का आरोप उन्होंने कांग्रेस के दबंग नेताओं पर लगाया।

दबंग कांग्रेसियों ने पीटा भी पीड़िता ने बताया कि उन्होंने इन निर्माण कार्यों के नाम पर सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने उनके और उनके परिवार को मारने पीटने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। दबंग से विवाद के चलते उन्होंने गांव छोड़ दिया है और न्याय की आश में पिछले 2 साल से बेघर महिला अपने परिवार सहित सारंगढ़ में किराए के मकान पर रह रही है। लेकिन शासन-प्रशासन ने 13 महीने तक इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और कार्यवाही न होने से गांव के दबंग कांग्रेसी नेताओं के हौंसले बुलंद है।

, अब तक 76% वितरण इस बीच सोमवार 21 जुलाई 2025 को पटवारी जांच के लिए गांव पहुंचा, परंतु नक्शा अधूरा होने के कारण मौके पर सीमांकन नहीं हो सका। जबकि पंचनामा में यह दर्ज किया गया कि विवाद के होने की स्थिति में अन्य पटवारी और राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में पंचनामा प्रतिवेदन की कार्रवाई कराई जानी चाहिए। पीड़िता का आरोप है कि यह केवल औपचारिकता निभाने जैसी कार्रवाई थी, जिससे अब न्याय की उम्मीद भी कमजोर पड़ रही है। न्याय की उम्मीद भी अब टूटने लगी है… पीड़िता का इस बारे में कहना है कि अब उसकी न्याय की उम्मीद टूटने लगी है। उसके घर को जबरन तोड़ा गया, उसके आने जाने का रास्ता बंद किया गया, उसके पति बच्चों को पीटा गया। उसे अपना गांव तक छोड़कर जाना पड़ा। जिले के सबसे बड़े अधिकारी से शिकायत के बाद भी जांच के लिए 13 महीने लग गया और 13 महीने बाद भी जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता और खानापूर्ति कर चले गए। ऐसे में न्याय की उम्मीद कैसे और किससे की जाए..??

ब्यूरो रिपोर्ट 

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