एमसीबी / मनेन्द्रगढ़ – छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ वन मण्डल अंतर्गत खोंगापानी वन परिक्षेत्र में बनाए गए लगभग 4 तालाब और 3 स्टॉप डेम के निर्माण कार्यों में करोड़ों रुपये की गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शासन की मंशा स्थानीय लोगों को रोजगार देने की थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। आरोप है कि स्थानीय मजदूरों को काम से वंचित कर अन्य ग्राम पंचायतों से चहेते मजदूरों को बुलाकर कार्य कराया गया।

विवरण इस प्रकार है
सूत्रों के अनुसार, तालाब स्टाप डेम निर्माण में जिन बोल्डरों का उपयोग किया गया, वे जंगल से अवैध रूप से निकालकर लगाए गए। वहीं स्टॉप डेम में लगभग 70 प्रतिशत गिट्टी ठेकेदार के माध्यम से और शेष 30 प्रतिशत जंगल से निकाले गए बोल्डरों से इस्तेमाल की गई। इतना ही नहीं, निर्माण में उपयोग किए गए मसाले का अनुपात भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।


आरोप है कि कार्य में लोकल सरिया उपयोग किया गया, जिसकी मोटाई मात्र 8 और 10 एमएम थी, जबकि मानक इससे अधिक होना चाहिए था। मजदूरी भुगतान में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है — 8 से 10 मजदूरों को छोड़कर अधिकांश को नकद भुगतान किया गया, जबकि रिकॉर्ड में इसे बैंक खातों में भुगतान बताया गया। पूरी प्रक्रिया ठेकेदारी प्रथा के तहत कैश पेमेंट से कराई गई बताई जा रही है।
प्रशासनिक चुप्पी
जब इस मामले में मनेन्द्रगढ़ वन परिक्षेत्र के रेंजर साहब रामसागर कुर्रे से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसी क्रम में डीएफओ साहब मनीष कश्यप से भी संपर्क संभव नहीं हो सका। इससे विभागीय स्तर पर जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं और भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलने के आरोप तेज हो गए हैं।



जांच के आदेश:
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीसीएफ अंबिकापुर और पीसीसीएफ रायपुर को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद बैकुंठपुर डीएफओ परदेशी साहब को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए 15 दिनों में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच समयसीमा में पूरी होती है या फिर करोड़ों के इस कथित घोटाले को दबाने की कोशिश की जाती है। पूरे मामले पर क्षेत्रवासियों और पर्यावरण प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं।
विशेष रिपोर्ट खगेन्द्र यादव










