एमसीबी / मनेन्द्रगढ़ – जिले की सुरम्य वादियों में स्थित हसदेव नदी पर बना अमृतधारा जलप्रपात बरसात के मौसम में पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 100 फीट ऊंचाई से गिरते इस झरने की खूबसूरती हर साल सैकड़ों पर्यटकों को खींच लाती है, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से यह स्थल अब जानलेवा बनता जा रहा है। न सुरक्षा, न पुलिस मौजूदगी स्थानीय लोगों के अनुसार, जलप्रपात में पहले भी कई लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है।
इसके बावजूद भी पुलिस सहायता केंद्र में ताला लटका रहता है जिला प्रशासन द्वारा वर्षों पहले झरने के किनारे लगाई गई रेलिंग छतिग्रस्त हो चुकी है।
जिससे पर्यटकों के गिरने का खतरा बना रहता है। प्रशासन की सीमित तैयारी नागपुर हाईवे पुलिस चौकी प्रभारी शेष नारायण सिंह ने बताया कि पुलिस बल की कमी के बावजूद पेट्रोलिंग की जा रही है और लोगों को नीचे जाने से रोका जाता है।
वर्तमान में ग्राम पंचायत सचिव, कोटवार सहित 6 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बरसात को ध्यान में रखते हुए बेरिकेडिंग की जा रही है, जिससे लोग खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश न कर सकें।
मध्य प्रदेश से आए पर्यटक रोहित ने कहा, “यहां का दृश्य बेहद सुंदर है, लेकिन सुरक्षा के कोई पुख्ता उपाय नहीं हैं। प्रशासन को चारों तरफ रेलिंग लगानी चाहिए ताकि लोग सुरक्षित तरीके से झरने का आनंद ले सकें।” अमृतधारा जलप्रपात के पास भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जहां दर्शन हेतु लोग पहुंचते हैं। इस जलप्रपात तक लाई नामक गांव से लगभग 8 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क के जरिए पहुंचा जा सकता है।
यह स्थल न केवल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों बल्कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्राकृतिक सौंदर्य और श्रद्धा का संगम यह स्थान हसदेव नदी के पहाड़ी बहाव से निर्मित है, जो मेंड्रा (कोरिया) से निकलकर कई मोड़ों से गुजरती है और इस अद्भुत झरने का निर्माण करती है।
ब्यूरो रिपोर्ट










