CG Big Breaking”इश्क की आखिरी साँसें: जंगल में एक ही फंदे पर झूलती मिली दो प्रेमी आत्माएं — जब समाज ने नहीं मानी मोहब्बत, तो मौत बनी मंज़िल!”
एमसीबी 15 जून 2025! छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में एक दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां ग्राम बालागांव के सन्नाटे भरे जंगलों में रविवार की सुबह ग्रामीणों ने एक भयावह दृश्य देखा — एक ही फंदे पर झूलते हुए दो प्रेमी युगल के शव। युवक और युवती पिछले तीन दिनों से लापता थे। परिजनों की उम्मीद अब मौत के साये में तब्दील हो चुकी थी।
घटना मनेंद्रगढ़ कोतवाली थाना क्षेत्र की है। मृतकों की पहचान ग्राम पंचायत सरईटोला के घुटरा निवासी अमर सिंह (24 वर्ष) और उसी गांव की रहने वाली चंपा बाई अगरिया (20 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखते थे और लंबे समय से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। परंतु, समाज की संकीर्ण दीवारें और परिजनों की जिद उनकी मोहब्बत के रास्ते में कांटे बन गईं।
गायब हुए थे गुरुवार रात से:-
गुरुवार की रात अचानक दोनों अपने-अपने घरों से लापता हो गए। घरवालों ने पहले तो आपसी संपर्कों के जरिए खोजबीन की, लेकिन जब दोनों का कोई सुराग नहीं मिला, तब चिंता गहराने लगी। गांव वालों में कानाफूसी होने लगी कि कहीं दोनों साथ भाग तो नहीं गए? पर सच्चाई उससे भी कहीं अधिक दर्दनाक थी।
जंगल में मिली मोहब्बत की अधजली चिता:-
रविवार सुबह कुछ ग्रामीण बालागांव के जंगल की ओर लकड़ियां बीनने गए थे। वहां घाघी नदी के किनारे एक पेड़ से दुर्गंध आती महसूस हुई। नजदीक जाकर देखा तो उनकी रूह कांप गई — एक ही रस्सी से युवक और युवती लटके हुए थे। मौत का यह मंजर दिल को चीर देने वाला था। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना मनेंद्रगढ़ पुलिस को दी।
पुलिस जांच में सामने आई प्रेम कहानी की करुण परिणीति:-
सूचना मिलते ही मनेंद्रगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को नीचे उतारा। प्रारंभिक जांच में कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले। पुलिस ने मौके की परिस्थितियों को देखते हुए इसे सामूहिक आत्महत्या बताया। ग्रामीणों ने भी यह पुष्टि की कि अमर और चंपा के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि सामाजिक और पारिवारिक दबाव के चलते दोनों ने साथ मरने का निर्णय लिया। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और रिपोर्ट के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया।
एक और दुखद पहलू: अमर का टूटता परिवार!
इस दुखद घटना की एक और स्याह परत है। अमर सिंह के पिता प्रेम सिंह और उसकी एक बहन ने भी कुछ वर्षों पूर्व आत्महत्या कर ली थी। अब अमर की भी इसी तरह मौत ने पूरे परिवार को गहरे अवसाद में डुबो दिया है। गांव में हर आंख नम है और हर मन सदमे में।
जाति की दीवार बनी काल:-
ग्रामीणों की मानें तो दोनों की जाति अलग होने के कारण परिवार वाले उनके विवाह को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। दोनों ने कई बार परिवारजनों को मनाने की कोशिश की, लेकिन जब समाज और परिजन नहीं झुके, तो उन्होंने झुकना नहीं बल्कि टूट जाना बेहतर समझा।
गांव में पसरा मातम, समाज पर सवाल:-
घटना के बाद गांव में मातम छाया हुआ है। घर-घर में सिर्फ एक ही चर्चा है — “क्या आज भी प्यार करने की इतनी बड़ी सजा है?” ग्रामीणों में भी कई लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर परिवार और समाज थोड़ी समझदारी दिखाता, तो शायद दो जिंदगियां बच जातीं।
प्रशासन और समाज के लिए चेतावनी:-
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक चेतावनी है — कि यदि आज भी हम जाति, परंपरा और झूठे सम्मान के नाम पर प्रेम की हत्या करते रहे, तो ऐसे फंदे रोज नए प्रेमियों के लिए तैयार होंगे।










