CG Breaking”केशकाल की पहाड़ियों पर विकास का सुपर हाईवे!’’: 307.96 करोड़ की बाईपास योजना से बस्तर की किस्मत बदलेगी, डबल इंजन सरकार ने विकास को दी रफ्तार!

‘‘डबल इंजन सरकार में बस्तर बदल रहा है, अब विकास की गूंज घाटियों में भी सुनाई देगी!’’
” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय”
Bastar/छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में विकास की एक और ऐतिहासिक पटकथा लिखी जा रही है। यह पटकथा सड़कों पर बिछेगी, पुलों से जुड़ेगी और केशकाल की घाटियों से गुजरती हुई देश-दुनिया को यह बताएगी कि बस्तर अब पिछड़ा नहीं, उभरता हुआ क्षेत्र है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 307.96 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा चार लेन वाला केशकाल बाईपास बनाने की स्वीकृति दी गई है। यह बाईपास पेव्ड शोल्डर मानक के अनुरूप होगा और राष्ट्रीय राजमार्ग-43 (नया NH-30) के केशकाल घाट खंड को सुगम, सुरक्षित और निर्बाध बनाएगा।
इस अभूतपूर्व घोषणा पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हर्ष जताते हुए इसे “बस्तर की विकास यात्रा का निर्णायक मोड़” करार दिया।
‘‘घाट से गुजरती नई राहें, अब नहीं थमेगा बस्तर!’’
केशकाल घाट, जो अब तक ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं और कठिन चढ़ाई का पर्याय बन चुका था, अब राहत की सांस ले रहा है। यहां अब एक ऐसा बाईपास बनेगा, जो आधुनिक इंजीनियरिंग की मिसाल होगा। बाईपास के निर्माण से जहां एक ओर वाहनों की लंबी कतारें खत्म होंगी, वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों पर यातायात का दबाव भी कम होगा।
यह मार्ग उन व्यापारियों, सैलानियों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए भी वरदान साबित होगा, जो वर्षों से इस घाट के मुहाने पर फंसे हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री गडकरी का ट्वीट बना उम्मीद की रोशनी!

जब नितिन गडकरी ने अपने ट्विटर हैंडल से केशकाल बाईपास की स्वीकृति की जानकारी साझा की, तो बस्तर के लोगों की आंखों में उम्मीद की चमक दौड़ गई। उन्होंने लिखा:
‘‘छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में NH-43 (नया NH-30) पर केशकाल घाट खंड में 11.38 किलोमीटर लंबे 4-लेन बाईपास निर्माण को 307.96 करोड़ की लागत से स्वीकृति दी गई है।’’
यह सूचना न केवल एक परियोजना की घोषणा थी, बल्कि यह बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने का उद्घोष था।
मुख्यमंत्री साय बोले — ‘‘विकास अब केवल वादा नहीं, सच्चाई है!’’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गडकरी जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
‘‘डबल इंजन सरकार में बस्तर अब तेजी से प्रगति की ओर अग्रसर है। यह बाईपास परियोजना बस्तर को अवरोधों से मुक्त कर विकास के राजमार्ग पर अग्रसर करेगी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना जनजातीय अंचलों को राष्ट्रीय आर्थिक धारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी।
बस्तर का पर्यावरण भी बोलेगा — ‘‘थैंक यू!’’
बस्तर केशकाल बाईपास बनने से केवल यातायात ही नहीं सुधरेगा, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव भी दिखेगा। अब शहरी क्षेत्रों में वाहन कम चलेंगे, जिससे ध्वनि और वायु प्रदूषण दोनों में गिरावट आएगी। हरित आवरण को भी कम नुकसान होगा, क्योंकि ट्रैफिक का भार सीधे घाटी में स्थानांतरित होगा।
परियोजना की खास बातें:बिंदु विवरण
• परियोजना नाम केशकाल बाईपास,
• लंबाई 11.38 किमी,
• लागत ₹307.96 करोड़,
• मानक पेव्ड शोल्डर, 4 लेन,
• स्थान NH-43 (नया NH-30), केशकाल घाट, कोंडागांव जिला,
• लक्ष्य सुगम, सुरक्षित व निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करना,
यात्रा का समय घटेगा, दुर्घटनाएं कम होंगी!
केशकाल बाईपास से यात्रियों का कीमती समय बचेगा और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। अब तक जो ट्रक और भारी वाहन केशकाल घाट की तीखी चढ़ाई और संकरी सड़कों से गुजरते थे, वे अब आरामदायक मार्ग से सीधे निकल सकेंगे।
परियोजना में सेफ्टी गार्डरेल्स, साइनबोर्ड, लाइटिंग और ईको-फ्रेंडली डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार का अवसर:-
केशकाल में निर्माण कार्य के दौरान हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे न केवल बस्तर के युवाओं को अवसर मिलेगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। होटल, ढाबा, पेट्रोल पंप, मैकेनिक वर्कशॉप जैसी सहायक सेवाओं में भी वृद्धि की संभावना है।
विपक्ष मौन! विकास पर कोई सवाल नहीं!
जहां एक ओर इस परियोजना पर सरकार की सराहना हो रही है, वहीं विपक्ष खामोश है। अब तक बस्तर की उपेक्षा के आरोप लगाने वाले दलों के पास शायद इस बार कुछ कहने को नहीं बचा। बस्तर की जनता समझ चुकी है कि ‘‘अब काम बोलता है, वादे नहीं।’’
https://channelno1.in/2025/06/15/cg-big-breakingफर्जी-आदेश-झूठा-ओहदा-
बस्तर अब वीरगाथाओं और संघर्षों का प्रतीक भर नहीं, बल्कि विकास की रफ्तार पर दौड़ता हुआ भविष्य है।
केशकाल बाईपास केवल एक सड़क नहीं है — यह बस्तर के लिए एक नई पहचान, एक नई दिशा और एक नया विश्वास है।
डबल इंजन सरकार के इस फैसले ने साबित कर दिया है —”बस्तर अब रुकने वाला नहीं, दौड़ने वाला है!’’










